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केतु ग्रह शांति मंत्र जाप (Ketu Graha Shanti Mantra Jaap)
24 Hour - 36 Hour
Key Highlights
- केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए विशेष मंत्र जाप
- ग्रह दोष और राहु-केतु दोष शांति का अनुष्ठान
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करने का उपाय
- अचानक आने वाली समस्याओं और बाधाओं से सुरक्षा
- जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा
About this Puja
वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह को एक रहस्यमय और आध्यात्मिक ग्रह माना जाता है। यह ग्रह कर्म, मोक्ष, रहस्य और अप्रत्याशित घटनाओं से जुड़ा हुआ है।
जब कुंडली में केतु ग्रह अशुभ स्थिति में होता है या केतु की महादशा, अंतरदशा या प्रतिकूल गोचर चल रहा होता है, तब व्यक्ति को जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे:
• अचानक आर्थिक नुकसान
• मानसिक भ्रम और चिंता
• वैवाहिक जीवन में तनाव
• करियर में अस्थिरता
• रहस्यमयी या लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याएं
इन प्रभावों को कम करने के लिए Ketu Graha Shanti Mantra Jaap कराया जाता है। इस अनुष्ठान में पंडितों द्वारा केतु मंत्रों का हजारों बार जाप कराया जाता है और अंत में हवन किया जाता है जिससे ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
• Ketu Mantra -
ॐ केतवे नमः
या
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः केतवे नमः
• Ketu Vedic Mantra
ॐ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मर्य्या अपेशसे समुषद्भिरजायथाः ॥
• Ketu Gayatri Mantra
ॐ पद्मपुत्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नोः केतुः प्रचोदयात् ॥
• Beej Mantra
ॐ कें केतवे नमः ॥
• Tantric Mantra
ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः ॥
केतु मंत्र जाप की कुल संख्या:
• १७००० (सप्तदश सहस्त्र जाप)
यह जाप सामान्यतः
• 1 दिन | 3 दिन | 5 दिन
में पूर्ण किया जाता है।
केतु मंत्र जाप शुरू करने के लिए कुछ शुभ समय माने जाते हैं:
• मंगलवार
• गुरुवार
• केतु महादशा या अंतरदशा के समय
• चंद्र या सूर्य ग्रहण के समय
• कृष्ण पक्ष चतुर्थी
• अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र
पूजा शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
• रुद्राक्ष की 108 मनकों वाली माला का उपयोग
• साफ और शांत स्थान पर जाप
• पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना
• कुश या ऊन के आसन का उपयोग
• मन को एकाग्र और शांत रखना
केतु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय भी किए जा सकते हैं:
• मंगलवार या शनिवार को उपवास
• काले तिल, कंबल या सरसों का तेल दान
• भगवान गणेश की पूजा
• हनुमान जी की आराधना
• राहु-केतु शांति यंत्र धारण
• पारद शिवलिंग का अभिषेक
Puja Process
1️⃣ शुद्धिकरण
पूजा से पहले शरीर और पूजा स्थल की शुद्धि की जाती है।
2️⃣ संकल्प
आचार्य यजमान का नाम और गोत्र लेकर संकल्प लेते हैं।
3️⃣ गणेश पूजन
भगवान गणेश की पूजा करके सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
4️⃣ नवग्रह पूजन
नवग्रहों की पूजा करके ग्रहों को शांत किया जाता है।
5️⃣ केतु मंत्र जाप
पंडितों द्वारा केतु मंत्र का विशेष जाप किया जाता है।
6️⃣ हवन अनुष्ठान
मंत्रों के साथ हवन किया जाता है जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।
7️⃣ दान और समापन
पूजा के अंत में दान और प्रार्थना के साथ अनुष्ठान पूर्ण किया जाता है।
Benefits of this Puja
✨ मानसिक शांति और ध्यान में वृद्धि
✨ आध्यात्मिक विकास और आत्म-जागरूकता
✨ नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र से सुरक्षा
✨ राहु-केतु दोष के प्रभाव में कमी
✨ आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
✨ जीवन में संतुलन और स्थिरता
✨ स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति में सुधार
✨ कठिन परिस्थितियों में धैर्य और सहनशीलता
✨ परिवार में सुख-शांति और सामंजस्य
✨ करियर और शिक्षा में उन्नति
✨ गुप्त और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति
✨ पिछले कर्मों के प्रभाव को कम करने में सहायता
Puja Samagri List
Verified list of items required for this auspicious ritual.
भगवान गणेश की मूर्ति / फोटो
केतु देवता की मूर्ति / फोटो
नवग्रह चित्र
पूजा चौकी
लाल या गुलाबी कपड़ा
तांबे का कलश
नारियल
आम के पत्ते
रोली / कुमकुम
हल्दी
चावल (अक्षत)
फूल
फूल माला
अगरबत्ती
कपूर
घी का दीपक
सुपारी
पान के पत्ते
काला तिल
फल
मिठाई
पंचामृत
गंगाजल
मौली (कलावा)
रुद्राक्ष माला
हवन कुंड
लकड़ी (समिधा)
घी
हवन सामग्री
1. Location
2. Pandit
3. Time Slot
4. Details
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